वैसे तो कुछ ख़ास नहीं लिख पता हूँ , पर सोचा की अगर लिखने की आदत डाल ली जाये तो शायद कुछ सुधार हो सकता हैं | बस इसी मकसद से अपने दिल में उजागर होने वाले कुछ खयालो को पन्ने पर उतरने की एक कोशिश कर लेता हूँ | कविताएं मुझे बेहद पसंद हैं और अब एक कोशिश आपके सब पाठको के सामने.......
June 22, 2011
दोस्ती (भाग २)
April 26, 2011
दोस्ती
अकेला ही रह गया
पर पीछे कोई नहीं हैं छूटा
भिन्न पथो पर सब आगे बढ़ गए
सोच रहा था तन्हा बैठा
अकेला ही रह गया.....
खुश हू की ख़ुशी मिली मुझे
और कामयाबी ने गले लगाया तुम्हे
पर गम हैं अब सब व्यस्त होंगे
एक दुसरे को देखने को नयन तरसेंगे
शायद येही सोच रहा था मैं तन्हा बैठा
किस सन्दर्भ में अकेला रह गया.....
सोचते थे हम सब एक दुसरे के लिए
भलाई करने पर भला और बुराई पर बुरा
रचते थे षड़यंत्र जन्मदिन पर पिटाई के
वो क्या दिन थे फेल होने पर बधाई के
येही सोच रहा था मैं तन्हा बैठा
क्या सच में अकेला रह गया
दिन भर की मस्ती अब काम में बदलेगी
याद करके अब सोयेंगे हम रातों की हँसी
वो मेरे दोस्त का बीच रात में एक मूवी लेने आना
या बगल के कमरे वाले का सुट्टा जलाना
सच ही तो सोचा तन्हा बैठा
सब साथ बढे पर कुछ छूट गया
कैसे पल बिताये थे साथ हमने
क्या रिश्ता था निभाया सबने
अब यादें ही याद आएँगी
कभी कभी आँखें नाम कर जाएँगी
पर हम सबको आगे हैं बढ़ते रहना
संभाल कर रखना हैं ये दोस्ती का गहना
चाहे ४ मिनट के लिए हो या ४ साल
खुदा करे जलती रहे दोस्ती की मशाल
इसलिए सबको उत्कर्ष की शुभकामनाए
आप सब अपनी ज़िन्दगी में बहुत धन, दौलत और नाम कमाए
कही भी रहना दोस्त पर ये न भूल जाना
तुम्हारी ज़िन्दगी में मेरा आना और धीरे से चले जाना
सोच रहा था मैं येही तन्हा बैठा
जिसे पन्ने पर उतार दिया....
सलामे दोस्ती मेरे यारो
जो तुमने निभा लिया......
--- कुमार उत्कर्ष
(कट्पडी से चेन्नई जाते वक़्त ट्रेन में लिखी हुई कविता)
१७-०४-२०११
March 10, 2011
ह्रदय मंथन
कोई दिल को भा गया हैं मेरे
बेवफाई न की है ना ही मुझे देना
देखा नहीं कोई सपना बिन तेरे
पहुच हो तो सितारे भी तोड़ लाऊँ
एक हंसी क लिए शत बार मर जाऊं
सुनना आसान लग रहा होगा तुम्हे
पर कसम की कसम है मुझे
हर गीत में तुम्हारी ही आवाज़ ढूँढता हूँ
हर तस्वीर में एक ही अक्स खोजता हूँ
मेरी रूह से अब अलग न होना तुम
आवाज़ देकर मुझे कही न होना गुम्म
बिन तेरे जीना मुश्किल है अब मेरा
ढूँढता रहूँगा हर सांझ के बाद सवेरा
उस पल के आते ही झट आँखें मूँद लूँगा
तुम्हे अपने सपनो की दुनिया में कैद कर दूंगा ....
March 03, 2011
असलियत का आईना - जीवन के कटु सत्य
जब भी कोइ व्यक्ति किसी भी कार्यालय में अपना काम करना आरंभ करता हैं तो उसपर सभी की नज़रे टिकी रहती हैं | साधारण तोर पर तो उसके उपरी पद वाले उसपर निगाहें जमा कर रखते है ये देखने के लिए की वो काम कैसा कर रहा है ताकि उसकी उन्नति के बारे में वो सोच सके | अब होता ये है की उधाहरण के तोर पर अगर एक व्यक्ति 'अ' बहुत अच्छा काम कर रहा है तो उसके गुरुजन उसे बहुत आदर सम्मान देंगे, उसे उन्नति देंगे, उसके शुभ और खुशहाल भविष्य की कामना करेंगे | दिक्कत यह आती हैं की यह बात 'अ' के साथ काम करने वालो को पसंद नहीं आती | यह कोई अलग उधाहरण नहीं है, बल्कि ज़िन्दगी की एक सच्चाई सच्चे रूप से दर्शाने की कोशिश कर रहा हूँ मैं | जो लोग अभी कार्यरत नहीं हैं और यह पाठ पढ़ रहे है वो ये बात गाँठ बाँध ले की उनके ज़िन्दगी में ऐसे शण अवश्य ही आयेंगे |
खैर मैं अपनी बात को आगे बढ़ता हू | मैं यह कह रहा था की आपके साथ काम करने वाले कैसे ये बर्दाश्त कर सकते है की कोई उनसे ज्यादा ऊपर हो जाये ??? कैसे ये बर्दाश्त कर सकते है की उस कार्यालय में या उस ऑफिस में जो भी आप से पद में छोटे है वो आप ही का सबसे ज्यादा आदर सत्कार करे ??? उनसे ये कदापि बर्दाश्त नहीं होगा की अगर किसी को कोई परेशानी हो तो वो हर बार आप ही के पास आकर के सलाह मश्वारह करे |
ऐसे पल और ऐसे हालात अक्सर कार्यरत लोगो में देखने को मिलते है पर एक बात और भी सत्य हैं और वो यह की आपका कोई भी सहकर्मी कभी आपके खिलाफ कुछ नहीं उगलेगा | और आपसे भी हमेशा बहुत ही अच्छे तरह पेश आएगा , परतु अन्दर ही अन्दर ज्वेश और जलन की भावना उसे आपका बुरा चाहने और बुरा करने को उकसाती रहेगी | सबसे पहली बात तो यह हैं की आपके मन्न में कभी ऐसी भावना का उजागर हो तो शीग्र अति शीग्र इसका इलाज खुद से करे क्यूंकि जब ये भावना उजागर होगी तो उसका पता भी सबसे पहले आप ही को चलेगा | अगर कोई व्यक्ति आपसे अपने ज़िन्दगी के कुछ सिखाये हुए पल बाट रहा है तो कोशिश करनी चाहिए की आप उस हालात में कभी न फसे |
अब अगर हम बात करे उस व्यक्ति 'अ' की जो की बहुत नाम कम रहा हैं | अगर उसके सहकर्मी में कोई सहकर्मी बहुत बडबोला हो, जो की बिना सोचे ही कुछ भी बातें करता हो, तो भाई उस से तो बिलकुल रहा न जायेगा | ऐसे लोगो की एक ही परेशानी होती हैं न तो वो खुद कोई काम करेंगे ढंग से, न ही दुसरे को करने देंगे | हमेशा भले लोगो की राह में कांटे उगायेंगे ऐसे व्यक्ति | ये सोचते है की वह उस भले मानुष का नुक्सान कर रहे है परन्तु ऐसे हालत उस भले मानुष को शायद और भी मज़बूत और साहसी बनाते है | उनकी राह का काँटा बनाने के फेरे में वो खुद का तो सब कुछ सत्यानाश करा ही लेते हैं उलटे वो भले मनुष्य शायद और भी ऊपर बढ़ता जाता है | अब जब उनकी तरकीब नहीं चलती तब ऐसे लोग शुरू करते हैं गुटबाजी करना और नेतागिरी दिखाना | कभी खुद की तारीफ नहीं करेंगे, करेंगे दुसरे की तारीफ ये सोचकर की उनकी छवि अच्छी बन रही है | अपने साथ अपने काम करने वाले २-३ लोगो के साथ षड़यंत्र रचेंगे की कैसे 'अ' की ज़िन्दगी खुशाल से उदास बनायीं जाये | बस येही रचते रचते उनका जीवन चलेगा |
ऐसे लोगो को पहचानना काफी आसान है | मैं अपने पाठको को बतला दू की ऐसे लोगो को आप बहुत ही आसानी से पहचान सकते है | ऐसे कपटी और दुष्ट लोगो का साथ उन्ही के जैसे कपटी लोग देते है |
और आज भी दुनिया में भलाई ज्यादा हैं तभी शायद लोगो का भगवान् पर से विश्वास नहीं उठा |
इसीलिए ये कप्टती लोग हमेशा कम की तादाद में पाए जाते है | इनका एक छोटा सा गुट होता है जिसमे सामान सोच के चवन्नी मानसिकता वाले २-३ लोग ही होते है | बाकी के सभी छोटे एवं बड़े अधिकारी इनकी रंगत देखकर इनसे दूर ही रहना पसंद करते है | पर अभी भी वो लोग शांत नहीं होते |
'अ' जैसे भले मनुष्य को परेशान करने के बाद जब वो ये देखते हैं की " अरे ये क्या, हमारा वार उल्टा पद गया ये इंसान टूटने के जगह और भी मज़बूत बन गया हैं |" ये देख कर उनके मन्न में फिर से कुछ गिरी हुई हरकत करने की बिगुल बजती है |
अब साम, दाम, दंड, भेद सारे कुछ अपनाने की विधि सोची जाती है | अब यह गुट लग जाता है उस इंसान को मानसिक तोर पर प्रताड़ित करने में कैसे ?? पब्लिक में 'अ' का नाम उछाल कर गलत रूप से | सबसे पहला लक्ष्य होता है की 'अ' को पहले थोडा बदनाम किया जाये और उसका साथ देने वालो की तादाद कम की जाये | ऐसा नहीं हैं की लोग 'अ' का साथ छोड़कर उस कपटी संगठन में मिल जायेंगे |
पर उन लोगो को इसी से ख़ुशी होगी की लोगो ने साथ छोड़ा तो सही | अब पीठ पीछे बुराई होगी, गलत बातें होंगी , अव्फाहे फैलाई जाएँगी और न जाने क्या क्या षड़यंत्र रचा जायेगा | पर मैं अभी भी आप लोगो को एक जीवन के सत्य से परिचित करता हू की इन सब बातों का असर बहुत कम लोगो पर होगा | अगर आपके मित्रो की संख्या ५०० है तो इन बातो से अधिकतम ५ लोग प्रभावित होंगे |
अब लो भाई, फिर से ये षड़यंत्र भी नहीं चला अब क्या किया जाये ??? :((
अब कुछ और सोचा जायेगा | अब ये गुट सीधे ऊपर बैठे अधिकारियो को अपने निशाने पर लेगा |
ज़ाहिर सी बात है की अगर ४-५ लोग जाकर आपकी शिकायत करे तो आपके बॉस को या आपके सेनियर को येही लगेगा की हाँ भाई सही बात है, अगर इसके सहकर्मी ऐसी बातें कर रहे है तब तो सही ही होगा |
अब मैं आपसे एक सवाल पूछता हू हालाकि ये लेख काफी बड़ा हो गया है पर अगर आपने यहाँ तक इसे पढ़ा है तो एक जवाब अवश्य दे - क्या होगा आगे आपके सहकर्मियों की संख ४ या ५ हो और वो सारे आपके खिलाफ जाकर ज़हर उगल दे ???
मुझे आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा |
यह लेख आप लोगो के जवाब के बिना अधूरा हैं इसीलिए जावाब अवश्य दे | मित्रो इसे लिखने में बड़ी कठिनाई हुए है, सच में, पर आपसे बस एक वाकया ही लिखने को कहा है | लिखे ज़रूर |
और हाँ, कभी भी ज़िन्दगी में ऐसे हालत उत्पन्न हो, तो थक कर या हार मानकर कभी न बैठना |
ज़िन्दगी ने अभी शुरुआत की हैं , आगे मिलो के फासले तये करने है, बहुत सी मंजिलो को हस्सिल करना है, एक नए मुकाम तक पहुचना है | इन हालातो से लड़ना सीखना मित्रो | विश्वास करो ये हालात तुम्हे ज़िन्दगी जीना सीखला देंगे और जीवन का ये सफ़र बहुत सुहाना हो जायेगा |
आखिर किसी ने सच ही कहा है-
" वो ज़िन्दगी, ज़िन्दगी ही क्या जिसमे थोड़ी कड़वाहट मिठास के साथ न हो "
किसी ने ज़रूर कहा होगा ये वैसे तो, पर अगर नहीं कहा तो समझ लीजिये ये मेरी रचना है |
:))
आप सभी को जीवन में सदैव सफलता मिले ऐसी मेरी कमाना है |
आपका आभारी
--- उत्कर्ष
September 03, 2010
Love and Life Lessons
Recent events in my life have taught me that the best thing to do in any situation is just to love people. How can I be a better friend, a better Son, Brother or Sister,etc. So often we go through life and we don't really take the time to just simply love people.
For example I hop on a bus, I've got all this time to take interest in other people, en yet I just sit to myself, and pass the time, just wondering what others are up to. Most likely someone will come on, something about them will set an emotion off inside of me, and I will be quick to judge them. "What is that guy thinking dressing like that".
If you can relate to me in this way, I've realized that love is the answer. Love. What is love?
Love is patient, Love is kind, It does not envy, it does not boast, It is not proud, It is not rude, It is not self-seeking, It is not easily angered, It keeps no record of wrongs. Love does not delight in evil, but rejoices with the truth. Love always protects, always trusts, always hopes, always perseveres. Love bears all things, believes all things, hopes all things, endures all things. Love never ends. Love never fails.
Love is genuine: "Don't just pretend that you love others. Really love them" - Romans. Love is taking a moment to talk to the person sitting next to you on the bus, taking an honest interest in their life? Love is offering your seat to someone who is standing? Love is saying a prayer for the people riding with you, asking God to bless them. Love doesn't mean holding hands and kissing the gentleman sitting next to you.
I've started to see in my life that as I open up to love people, it's amazing at how things have changed in my. I heard this story of a girl walking home from school, terribly depressed and down on life. Ready to commit suicide when she arrives home, as she has just had enough. A classmate who had never spoken to her, comes up and asks if he can carry her books, and walk with her. Coles notes version is that because of the Love expressed by that boy, she didn't commit suicide and found new meaning in her life. We think of saving lives as firefighters and police officers. What about that boy? Is he a lifesaver? He didn't boldy enter a burning building or stop a fire. He simply just took the time to love.
My first response was and the one that I hear from most people is: I'm too busy, or I love enough already. I'd say if you honestly answer those questions you'd have the same response as I have. I'm not too busy. I just manage my time badly. I'm riding the bus anyways. Why not love the guy sitting next to me. I love enough already. There is never a time or a place in your life that you will love enough.