June 20, 2012

नींद (शायरी )

तडपाती , तरसाती  ज़िन्दगी , यहाँ  सिर्फ  और  सिर्फ  हैं  खोना .......
जब  थक  जाओ  रोते  चिल्लाते , आँख  बंद  कर  चैन  से  सोना ......
क्या  पता  फिर  कब  मिलेगी  ये  नींद , अपना  तो  किस्मत  भी  हैं  बौना ....
जब  परेशान  हो  जाओ  ज़िन्दगी  से  ....... उठना  मत  ऐसे  सोना .......!!!!

घुटन (शायरी )

ज़िन्दगी  मेरी  अब  हर  पल  खुद  ही  जिए  जा  रही  हैं .....
मेरी  क्या  हुकूमत  उसपे  दुनिए भी  मज़े  लिए  जा  रही  हैं .....
ना  मौत  आ  रही  हैं , ना  जान  जा  रही  हैं .....
कमबख्त  ज़ंजीरो  से  मुझे  सीए  जा  रही  हैं ......

May 27, 2012

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गर्दिश में तारे मेंरे  भले हो मगर
साथ न छोड़ देना तुम कभी मुह मोड़कर
वादा हैं जन्नत की सैर कराऊंगा
ख़ुशी और प्यार से तेरा हर लम्हा सजाऊंगा

चाँद के पार ना सही समुन्दर की लहरें दिखाऊंगा
सपनो का महल न बन सका तो रेत पर किला बनाऊंगा
तू अगर साथ रही हर दम, हर वक़्त, हर मोड़ पर
तो इन्शालाह एक दिन तारे भी तोड़ लाऊंगा

गर आज दे न सकू तुझे चंद फूल वो गुलाब के
ये न सोच लेना की तुझे भूल मैं भाग जाऊंगा
तिनके तिनके से जिस तरह बनता हैं एक घरोंदा
एक एक ईट उस तरह अपना घर सजाऊंगा

गर रूठ जाये भी कभी तू तो तेरे तकिये के किनारे
अपना सर रख कर मैं शायद अश्रु भी बहाऊंगा
पर कर यकीन मुझपर और याद रखना सदा
ख़ुशी और प्यार  से तेरा हर लम्हा सजाऊंगा....

May 24, 2012

असमंजस

दिल को बोला संभल जा ज़रा
दिल न माना फिर मेरी बात
एक बार फिर भरोसा कर के
पहुंचा ह्रदय पे गहरा आघात

ये क्या हैं विडंबना, क्या हैं बात
क्यों बहक गए हैं आज फिर से जज़्बात
याद नहीं क्या उनको वो दिन
जब खाया था एक विश्वासघात

सुना हैं बाखूब किसी शायर से
दिल संभल जा ज़रा फिर बहक रहा है तू
मैं कहता लौट कर वापिस मत आना मेरे पास
मैं खुद नहीं सोच पाउँगा की मैं क्या बोलू

खुदा के बन्दे पर नीमत हैं उसकी
बच निकले थे जैसे तुम पिछली बार
आखिरी बार कह रहा हू संभल जा
टूट न जाए कही दिल के वो तार,
और बिखर जाये ज़िन्दगी की झंकार......!!!

September 17, 2011

प्रेरणा

जब मंजिले नज़र आये और रास्ता न मिल पाए
रख हिम्मत मेरे यार, आओ एक पथ पर चलते ही जाए

जब रोशिनी दिखे कही दूर पर किरण न पहुच पाए
रख होसला ज़रा, चल एक नया दीप जलाए

जब रास्ते पर कुछ लोग तेरे लिए काँटा बन जाए
रख भरोसा खुदपर, देखना कही कदम ना डगमगाए

जब कड़ी धुप में हालात भी तेरा खून खौलाए
रख इतनी ढंडक अपने दिल  में कि इन्द्र भी खुद बरसाए

जब दुनिया में, तेरे आलोचकों की संख्या बढ़ जाए
रख संयम इतना कि उनको भी तू माफ़ कर पाए

जब अपने हो जाये पराए और दूरियाँ बढती जाए
रख उम्मीद हमेशा, देख दिल टूट ना पाए

जब जब  इन सारी बातों से तेरा दिल घबराये
भूल उन पलो, उन किस्सों को जो तुने थे सजाये

होकर मगन अपने धुन में याद रख सदा
राही का तो काम हैं चलता जाए, चलता जाए ||

June 22, 2011

दोस्ती (भाग २)

इन आँखों में अश्रु अब पल पल आ जाते हैं
जब मुझे मेरे वि०आई०टी के दिन याद आते हैं
दोस्तों की आवाज़ कानो में गूंजती हैं सदा
रोते रोते हम एक बार फिर जी जाते हैं

दिल के दीवारों पर वोही तस्वीरे नज़र आती हैं
जिसमे रहते मेरे यार, मेरे प्रिय सहपाठी हैं
अब जब भी वो बीतें लम्हे याद आते हैं
रोते रोते हम एक बार फिर जी जाते हैं

यादों के सहारे ही अब ज़िन्दगी आगे बढ़ाते हैं
पुरानी बातें याद कर के, आए दिन मुस्कुराते हैं
ऐसी यादें छोर चुके हो तुम सब इस दिल में
रोते रोते हम एक बार फिर जी जाते हैं

ये कविता नहीं दिल की बात कही हैं तुम सबसे 
अब तुम सब की बहुत याद सताती हैं 
और जब भी कोई सामने आ जाता हैं यादें लिए 
दिल ही दिल में हम एक बार फिर जी जाते हैं 

कुमार उत्कर्ष द्वारा सभी दोस्तों को समर्पित ||
धन्यवाद 

April 26, 2011

दोस्ती

सोच रहा था  तन्हा बैठा
अकेला ही रह गया
पर पीछे कोई नहीं हैं छूटा
भिन्न पथो पर सब आगे बढ़ गए

सोच रहा था तन्हा बैठा
अकेला ही रह गया.....

खुश हू की ख़ुशी मिली मुझे
और कामयाबी ने गले लगाया तुम्हे
पर गम हैं अब सब व्यस्त होंगे
एक दुसरे को देखने को नयन तरसेंगे

शायद येही सोच रहा था मैं तन्हा बैठा
किस सन्दर्भ में अकेला रह गया.....

सोचते थे हम सब एक दुसरे के लिए
भलाई करने पर भला और बुराई पर बुरा
रचते थे षड़यंत्र जन्मदिन पर पिटाई के
वो क्या दिन थे फेल होने पर बधाई के

येही सोच रहा था मैं तन्हा बैठा
क्या सच में अकेला रह गया

दिन भर की मस्ती अब काम में बदलेगी
याद करके अब सोयेंगे हम रातों की हँसी
वो मेरे दोस्त का बीच रात में एक मूवी लेने आना
या बगल के कमरे वाले का सुट्टा जलाना

सच ही तो सोचा तन्हा बैठा
सब साथ बढे पर कुछ छूट गया

कैसे पल बिताये थे साथ हमने
क्या रिश्ता था निभाया सबने
अब यादें ही याद आएँगी
कभी कभी आँखें नाम कर जाएँगी

पर हम सबको आगे हैं बढ़ते रहना
संभाल कर रखना हैं ये दोस्ती का गहना
चाहे ४ मिनट के लिए हो या ४ साल
खुदा करे जलती रहे दोस्ती की मशाल

इसलिए सबको उत्कर्ष की शुभकामनाए
आप सब अपनी ज़िन्दगी में बहुत धन, दौलत और नाम कमाए
कही भी रहना दोस्त पर ये न भूल जाना
तुम्हारी ज़िन्दगी में मेरा आना और धीरे से चले जाना

सोच रहा था मैं येही तन्हा  बैठा
जिसे पन्ने पर उतार दिया....
सलामे दोस्ती मेरे यारो
जो तुमने निभा लिया......

--- कुमार उत्कर्ष
     (कट्पडी से चेन्नई जाते वक़्त ट्रेन में लिखी हुई कविता)
     १७-०४-२०११