September 17, 2011

प्रेरणा

जब मंजिले नज़र आये और रास्ता न मिल पाए
रख हिम्मत मेरे यार, आओ एक पथ पर चलते ही जाए

जब रोशिनी दिखे कही दूर पर किरण न पहुच पाए
रख होसला ज़रा, चल एक नया दीप जलाए

जब रास्ते पर कुछ लोग तेरे लिए काँटा बन जाए
रख भरोसा खुदपर, देखना कही कदम ना डगमगाए

जब कड़ी धुप में हालात भी तेरा खून खौलाए
रख इतनी ढंडक अपने दिल  में कि इन्द्र भी खुद बरसाए

जब दुनिया में, तेरे आलोचकों की संख्या बढ़ जाए
रख संयम इतना कि उनको भी तू माफ़ कर पाए

जब अपने हो जाये पराए और दूरियाँ बढती जाए
रख उम्मीद हमेशा, देख दिल टूट ना पाए

जब जब  इन सारी बातों से तेरा दिल घबराये
भूल उन पलो, उन किस्सों को जो तुने थे सजाये

होकर मगन अपने धुन में याद रख सदा
राही का तो काम हैं चलता जाए, चलता जाए ||

12 comments:

lifes' like this.. never fair never right said...

I have only one word - "Gazab".. Loved every bit of it :) specially
जब रोशिनी दिखे कही दूर पर किरण न पहुच पाए
रख होसला ज़रा, चल एक नया दीप जलाए..

and the last line .. loved it loved it loved it :)

The Rhythm said...

अत्यंत प्रशंश्निये प्रयास || बहुत खूब || सराहनीय

Kumar Utkarsh said...

@rishi bhaiya.... thanks a lot bhai.... and i loved ur comment... :) :)

@rythm : thanks... :)

Kumar Utkarsh said...

@rythm... waise naam bahut accha hain profile ka... :P

Ayush Jain said...

Wow.. Mast likha hai.. Quite inspirational.. Arey but aapne pehle kyun nahi post ki ye kavitaayein..? Anyways.. Will be waiting for the next one..The best part I like is the last line...:))

NISHTHA GUPTA said...

awsome thought...

NISHTHA GUPTA said...

awsome thought utki...

yamini said...

awesome poem!!!

prateek mathur said...

जब अपने हो जाये पराए और दूरियाँ बढती जाए
रख उम्मीद हमेशा, देख दिल टूट ना पाए

this is my fav line..
great work brother

Kumar Utkarsh said...

Thanks all of you for such lovely and encouraging words..... :)

Patali-The-Village said...

बहुत ही सटीक और भावपूर्ण रचना। धन्यवाद।

king said...

aaj main b bahut nirash tha par is kavita ko padane k baad lagta hai jindagi isi ka naam hai......
kabhi upar kabhi neeche...
kabhi aage to kabhi peeche.....

Thanks bro.....for inspiring me again ...